पुस्तक (सुरक्षा किडनी की)

''सुरक्षा किडनी की'' किडनी के रोगो से संबंधित सर्वप्रथम संपूर्ण हिन्दी पुस्तक है| डॉ संजय पंडया ने २० सालों के किडनी रोग विशेषग्न के अनुभवो के बाद यह पुस्तक तथा वेबसाईट तैयार की है| इसलिए मरीजों और जन साधारण के लिये किडनी रोगों के विषय में अत्यंत महत्वपूर्ण सभी जानकारियाँ आपको इस पुस्तक एवं वेबसाईट में मिलेगी|

किडनी फेल्योर की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है|किन्तु आम जनता में किडनी के रोगो के लक्षणों की जानकारी और जाग्रति का अभाव रहता है| किडनी जब ज्यादा खराब हो जाती है तब डायालिसिस और किडनी प्रत्यारोपण जैसे महंगे एवं कष्टप्रद उपचार (करवाने पड़ते) है| भारत जैसे विकासशील देश में १०% मरीज ही ऐसे महंगे इलाज करवा पाते है| इसलिए किडनी के रोगो की रोकथाम एवं बीमारी होने पर प्रारंभ से ही उपचार करना शरू कर देना यही किडनी की सुरक्षा का एकमात्र विकल्प है| वर्तमान समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को किडनी रोगो से मुक्त रहना आवश्यक है| उन्हें इस संबंध में सजग करना ही इस पुस्तक तथा वेबसाईट का मुख्य उददेश्य है| यह पुस्तक तथा वेबसाईट  द्वारा भारत तथा विश्व भर के लाखों हिन्दी भाषियों की किडनी संबंधित जिग्नाषा पूरी होगी|

इस पुस्तक के दो भाग है| पहले भाग में किडनी के बारे में प्रारंभिक जानकारियाँ है| इस भाग में किडनी की रचना और कार्य, किडनी के रोगो के लक्षण और निदान, किडनी के रोगो के संबंध में गलत धारणाएं और हकीकत और प्रत्येक व्यक्ति के लिए किडनी का ख़राब होने से बचाने के उपायों का समावेश किया गया है|

पुस्तक का दूसरा भाग किडनी के मरीज और उनके परिवारजन अपनी जिग्नासा एवं आवश्यकता के अनुसार पढ़ें| इस भाग में किडनी के विभिन्न रोगों के लक्षण, निदान उनकी रोकथाम और चिकित्सा की जानकारियाँ दी गई है| क्रोनिक किडनी फेल्योर, डायालिसिस, किडनी ट्रान्सप्लान्टेशन और डायबिटीज के कारण किडनी फेल्योर जैसी किडनी की महत्वपूर्ण बीमारी के बारे में इस भाग में विस्तृत जानकारियाँ दी गई है|

किडनी के मरीजों के लिए आहार में परहेज की आवश्यक जानकारियाँ भी दुसरे भाग में है| इस पुस्तक में दी गई जानकारियाँ डाक्टर की सलाह और उपचार की पूरक है| इस पुस्तक एवं वेबसाईट को पढ़ कर डाक्टर के उपचार एवं परहेज में स्वयं परिवर्तन करना खतरनाक हो सकता है|

डॉ संजय पंडया द्वारा लिखत एवं हिन्द पॉकेट बुक दिल्ली द्वारा २००८ में प्रकाशित इस पुस्तक की १०.००० प्रतियाँ का प्रथम साल में ही बिक जाना उसकी लोकप्रियता का सूचक है|